मंगलवार, 10 जनवरी 2017

सत्ता में पूर्ण बहुमत से होने पर भी हिन्दू नेताओं की प्रवृत्ति नपुंसकता की क्यों ?

भारत के लगभग आधे राज्यों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सरकारे हैं,
केन्द्र में भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पूर्ण बहुमत की सरकार हैं।
(यह मत कहने लगना कि संघ का राजनीति से कोई लेना देना नहीं हैं, देश का प्रधानमन्त्री, गृहमन्त्री व अनेक राज्यों के मुख्यमन्त्री भी संघी ही हैं। वैसे भी भारतीय जनता पार्टी संघ का एक अनुसांगिक संगठन मात्र हैं।)
इतना सब होते हुए भी देश का एक मुसलमान धर्मगुरू जिसे देश की गांधीवादी सरकारे साम्प्रदायिकता को बढ़ाने के लिए सरकारी धन देती हैं (क्योंकि हिन्दू विरोधियों द्वारा संकलित वर्तमान भारतीय संविधान में गैर हिन्दुओं को विशेषाधिकार दिया गया है।) देश के प्रधानमंत्री का सर मूँड़ कर लाने वाले को २५ लाख का इनाम देने की घोषणा कर देता हैं। कथित रूप से अल्पसंख्यक होते हुए मुसलमान धर्मगुरू जब इतना दुष्साहस कर रहा है, तो सोचो जब मुसलमान बहुसंख्यक हो जायेगा तो प्रधानमंत्री का सर लाने पर इनाम की घोषणा नहीं बल्कि हिन्दुओं को इस्लाम स्वीकार करने की घोषणा करेगा।
केन्द्र और राज्य सरकारे नपुंसकता की चूडी पहनकर चुपचाप बैठी हैं ?

संविधान बदलों, धर्म बचाओं।
-विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल

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