टीपू सुलतान पूरे दक्षिण भारत को इस्लामिक राज्य बनाने वाला पिशाच था; परंतु अंग्रेज-ईसाईयों के विरोध के कारण उसका यह सपना विफल हो गया। अंग्रेजों द्वारा जीता, स्वयं के (नहीं, हिन्दू राजाओं से छीन कर लिया हुआ) राज्य को मुक्त करने हेतु उसने अंग्रेजों से युद्ध किया। उसने देश की स्वतंत्रता के लिए कभी लडाई नहीं की। ऐसी स्थिति में उसे राजनेताओं व इतिहासकारों द्वारा ‘स्वतंत्रता सेनानी’ कहना, कैसे उचित होगा ? यदि वो स्वतंत्रता सेनानी होता, तो बाबर, औरंगजेब, अफजल खान तथा गजनी का मुहम्मद समान आक्रमक कौन थे ? क्या वे भी स्वतंत्रता सेनानी थे ?
क्या टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता सेनानी बताया जाना देश के उन अमर बलिदानियों का अपमान नहीं हैं, जो क्रुर अरब साम्राज्यवादी टीपू सुल्तान से अपने धर्म व राष्ट्र की रक्षा करते हुए बलिदान हुए ??
-विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल
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