अद्भुत है इनकी कहानी,
राष्ट्र-धर्म की खातिर बेटों की दे दी कुर्बानी
🍁 कच्छा, कड़ा, केश, कंघा और कृपाण.....खालसा पंथ की स्थापना करने के बाद गुरू गोविंद सिंह जी ने बड़ा सा कड़ाह मंगवाया। इसमें स्वच्छ जल भरा गया। उनकी पत्नी सुंदरी ने इसमें बताशे डाले। पंच प्यारों ने कड़ाह में दूध डाला और गुरूजी ने गुरवाणी का पाठ करते हुए उसमें खंडा चलाया। इसके बाद गुरुजी ने कड़ाहे से शरबत निकालकर पाँचों शिष्यों को अमृत रूप में दिया और कहा, तुम सब आज से सिंह कहलाओगे और अपने केश तथा दाढी बढ़ाओगे।
🌰 *गुरू जी ने कहा कि केशों को संवारने के लिए तुम्हे एक कंघा रखना होगा। आत्मरक्षा के लिए एक कृपाण लेनी होगी। सैनिकों की तरह तुम्हें कच्छा धारण करना पड़ेगा और अपनी पहचान के लिए हाथों में कड़ा धारण करना होगा। इसके बाद गुरू जी ने सख्त हिदायत दी कि कभी किसी निर्बल व्यक्ति पर हाथ मत उठाना।*
🏵 इसके बाद से सभी सिख खालसा पंथ के प्रतीक के रूप में केश, कंघा, कृपाण, कच्छा और कड़ा ये पांचों चिन्ह धारण करने लगे। नाम के साथ सिंह शब्द का प्रयोग किया जाने लगा। इस घटना के बाद से ही गुरू गोविंद राय गोविंद सिंह कहलाने लगे। उन्होंने अंतिम साँस महाराष्ट्र के नांदेड शहर में स्थित हजूर साहिब सचखंड गुरूद्वारे में ली जो विश्व भर में प्रसिद्ध है।
🏹 *गुरू गोविंद सिंह जी ने अपने प्रिय घोड़े दिलबाग के साथ यहाँ अंतिम साँस ली थी। गुरू गोविंद सिंह जी ने धर्म प्रचार के लिए यहाँ अपने कुछ अनुयायियों के साथ पड़ाव डाला था, इसी दौरान सरहिंद के नवाब वजीर शाह ने अपने दो आदमी भेजकर उनकी हत्या करवा दी थी।*
😳 ऐसा कहा जाता है कि यह हत्या धार्मिक तथा राजनैतिक कारणों से कराई गई थी। पवित्र ग्रंथ को उत्तराधिकारी मानने का आदेश अपनी मृत्यु को समीप देखकर गुरू गोबिन्द सिंह जी ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में किसी अन्य को गुरू चुनने के बजाय सभी सिखों को आदेश दिया कि मेरे बाद आप सभी पवित्र ग्रन्थ को ही गुरू मानें। इस आदेश के बाद से ही पवित्र ग्रन्थ को *गुरू ग्रन्थ साहिब* कहा जाता है।
गुरू गोविंद सिंह जी, भारत स्वाभिमान दल के आदर्श प्रेरकों में से एक हैं, उनका जीवन प्रत्येक स्वाभिमानी भारतीय को कर्मशील बनने की व धर्मरक्षा करने की प्रेरणा देता हैं। भारत स्वाभिमान दल गुरू गोविन्द सिंह जी के श्रीचरणों में नमन करता हैं।
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