सोमवार, 2 जनवरी 2017

भारतीय संस्कृति अपनाओं, भारतीय बनों।

पश्चिम से इंडियनों ने सार्वजनिक चुम्बन लिया, समलैंगिकता ली, लिव-इन-रिलेशनशिप लिया, नंगी-पुंगी लड़कियाँ भी पाई, नाबालिग कन्याओं के गर्भपात भी बस दहलीज पर खड़े ही हैंं...
लेकिन इंडियनों ने पश्चिम से अनुशासन, समय की पाबन्दी, राष्ट्र व धर्म के दुश्मनों को मार गिराने की प्रतिबद्धता, अपने राष्ट्र हित के लिए "किसी भी हद" तक जाने की "सटीकता" नहीं सीखी...। धिक्कार है इंडियनों को...
दूसरों को दोष क्यों दें ???
हे इंडियनों ! मूर्खता त्यागकर पश्चिम की गिनी चुनी अच्छाइयों व भारतीय संस्कृति के मूलभूत तत्वों को अपने अन्दर धारण करों, और सिद्ध कर दो कि तुम राम, कृष्ण,
शिवा, प्रताप, गोकुल, सुहेलदेव, गोविन्द सिंह की सन्ताने हो।
भारतीय संस्कृति अपनाओं, भारतीय बनों।
-विश्वजीत सिंह अनंत
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारत स्वाभिमान दल

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