सबसे पहले तो भारत स्वाभिमान दल यहीं चाहता है कि आरक्षण केवल गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा हेतु हो, नौकरी वो अपनी योग्यता के आधार पर प्राप्त करें | पर जब तक ऐसा सम्भव नहीं होता तो आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था की जा सकती है | आर्थिक आधार पर आरक्षण किसे दिया जाये और किसे न दिया जाये ?
1. जो बच्चे 10+2 तक सरकारी विद्यालयों व बाद में सरकारी महाविद्यालयों में ही पढ़े हों, सिर्फ उन्हें ही आरक्षण मिले, प्राइवेट स्कूलों में पढ़े हुए बच्चों को नहीं।
सरकारी स्कूल में पढ़े बच्चे वास्तव में ही गरीब होते हैं, अमीर के बच्चे तो प्राइवेट विद्यालयों में पढ़ेंगे।
2. जिस परिवार में तीन से अधिक बच्चे हों, उस परिवार के किसी बच्चे को आर्थिक आरक्षण नहीं मिलेगा क्योंकि आरक्षण की मदद उनके लिए होती है जिन पर जिंदगी बोझ हो, उनके लिए नहीं जो देश पर बोझ हों।
3. अगर एक बार भी विधायक, सांसद या किसी अन्य सरकारी लाभ के पद पर रहे हो या क्लास 3 या इससे ऊपर की सरकारी नौकरी तक गए हो तो आर्थिक आरक्षण के दायरे से बाहर हो गए।
4. जिसके माता या पिता पहले से ही आरक्षण का लाभ पाकर सरकारी नौकरी में कार्यरत हो उनके बच्चे को भी आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
4. अति उपजाऊ भूमि में 5 एकड़ से कम, मध्यम उपजाऊ भूमि में 15 एकड़ से कम व रेगिस्तानी भूमि में 25 एकड़ से कम वाले छोटे व गरीब किसानों के बच्चों को ही आरक्षण मिलेगा।
6. कभी खुद का चार पहिया वाहन न रहा हो और शहर में अपना मकान न हो, सिर्फ उन्हीं गरीबों के बच्चों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाये।
अभी के लिए इतना काफी है, आर्थिक आरक्षण मिलने के बाद कहीं से गलत सेंध लगे, उसकी समीक्षा करके वो रास्ते बन्द किये जाते रहें।

Aarakshan Bharat Desh Ke Liye Bahut Ghatak hai
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