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ये लो प्रमाण, गाँधी ने हिन्दुओं को कहा था
मुस्लिमों के हाथों वीरता से मर जाओ
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तो सवाल ये कि कोई वीरता से कैसे मरता है
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और ये भी कि क्या कायरता वीरता का पर्याय है
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★ गाँधी की संध्या प्रार्थनाओं का अधिकृत संकलन खुलेआम उपलब्ध है। ऐसे ही एक संकलन के अनुसार 6 अप्रैल सन 1947 को गांधी ने अपनी एक प्रार्थनासभा में हिन्दुओं को नसीहत दी थी कि यदि मुसलमान उन्हें मारना चाहते हैं तो वह वीरता से उनके हाथों मर जाएं। कोई गाँधी से तो अब यह पूछ ही नहीं सकता कि वीरता के साथ मर जाने से उनका क्या आशय है। इसका जवाब देने को वो अब हैं ही कहाँ ?
★★ पर गाँधी के अनुयायियों से तो पूछा ही जाना चाहिए कि गाँधी के इस कथन का क्या अर्थ है ? क्या इसका अर्थ ये है कि यदि मुसलमान हमसे लड़ने आए, हमें मारने आए तो वीरता से हम भी उनके सिर कलम कर दें। भले ही ऐसा करते हुए हम भी मर ही जाएं। सिर झुका कर मरना तो आखिर वीरता से मरना हो नहीं हो सकता। देशविभाजन के कोई सवा-चार माह पूर्व प्रकट किये गये इस गाँधी-उवाच से आप क्या समझते हैं ?
गांधी एक इस्लाम का भक्त था । एक महापापी इंसान जिसने आज़ादी के वक़्त मुस्लिम को रुख्वा कर देश का भविष्य खतरे में डाला ।
जवाब देंहटाएंनथराम गोडसे जी ने मार कर अच्छा काम किया । गोडसे जी असली राष्ट्रपिता है ।
गांधी फर्जी 430 इंसान
गांधी एक इस्लाम का भक्त था । एक महापापी इंसान जिसने आज़ादी के वक़्त मुस्लिम को रुख्वा कर देश का भविष्य खतरे में डाला ।
जवाब देंहटाएंनथराम गोडसे जी ने मार कर अच्छा काम किया । गोडसे जी असली राष्ट्रपिता है ।
गांधी फर्जी 430 इंसान